राजकुमार धनोरा का आरोप, जिपं अध्यक्ष की पत्नी का बेशकीमती जमीनों पर अवैध कब्जा, प्रभावित बोले सब झूठ

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सागर। सोमवार को सिविल लाइंस में कांग्रेस नेता राजकुमार धनोरा एक बार फिर प्रेस से मुखातिब हुए। उन्होंने बाकायदा एक लिखित प्रेस नोट जारी किया और सीधे जिला पंचायत अध्यक्ष हीरासिंह राजपूत की पत्नी सरोजसिंह पर बेशकीमती सरकारी, मंदिर ट्रस्ट और निजी भूमियों पर अवैध कब्जे के आरोप जड़ दिए। धनोरा का कहना था कि होटल रॉयल पैलेस, के विभिन्न हिस्से सरकारी जमीन पर बने हैं। जिसकी अतिक्रमणकारी जिला पंचायत अध्यक्ष राजपूत की पत्नी हैं। इसके अलावा उन्होंने होटल रॉयल पैलेस आसपास के 43 प्लाटधारियों की जमीन पर भी सरोजसिंह द्वारा कब्जा करने के आरोप लगाए। उन्होंने प्रेस नोट के जरिए मानसिंह पटेल की गुमशुदगी जैसे मामलों को भी उखाड़ा। वे राजपूत परिवार के पैतृक गांव जेरई तक भी पहुंचे। जहां उन्होंने ज्ञानवीर प्राइवेट विवि के छोटे-छोटे काश्तकारों की जमीन हड़पने का आरोप लगाया। धनौरा ने जिला प्रशासन से मांग की कि उक्त सभी जमीनों से कब्जा हटवाते हुए राजपूत को जिला पंचायत अध्यक्ष के पद से पृथक किया जाए।
“हीरालाल-हीरालाल” बोलते रहे प्रभावितों ने आरोप नकारे
राजकुमार धनोरा की इस पत्रकार वार्ता में कई झोल भी दिखे। जैसे कि उन्होंने पत्रकारों के समक्ष जो आरोप लगाए। उसकी उन्होंने पूर्व में सरकारी स्तर पर कहीं पर भी शिकायत नहीं। जिन लोगों के हित में वह यह आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे। उनमें से एक भी व्यक्ति उनके साथ मौजूद नहीं था। जबकि यह लोग सक्षम लोग हैं। उदाहरण के लिए इनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र पाठक, जो इन प्लाट्स का आवंटन करने वाली वृंदावन धाम गृह निर्माण समिति के अध्यक्ष भी हैं, समेत समाजवादी नेता और विवि के पूर्व शिक्षक डॉ. बद्रीप्रसाद जैन, सरकारी वकील आशीष चतुर्वेदी, बीएमसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. देेवेंद्र अहिरवार आदि शामिल हैं। प्रेस कॉन्फे्रेंस में धनौरा, जिला पंचायत अध्यक्ष का सही नाम लेने से भी बचते दिखे। उन्होंने करीब आधा दर्जन बार हीरासिंह को हीरालाल कहा। पत्रकारों द्वारा टोकने पर उन्होंने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया कि मेरे दस्तावेजों में हीरालाल ही लिखा है। जबकि उनके दस्तखत से जारी प्रेस नोट में उन्होंने जिपं अध्यक्ष का सही नाम हीरासिंह राजपूत लिखा था।
पत्रकार वार्ता में इस तरह के लैकुना देख सागरवाणी ने कथित अतिक्रमण पीड़ितों से बात की तो उन्होंने अलग ही जवाब दिया। सरकारी वकील आशीष चतुर्वेदी ने कहा, जिस एरिया की बात हो रही है। वहां मेरे पिता के नाम से प्लाट है और हम लोगों ने वहां मकान भी बना लिया है। डॉ. अहिरवार ने कहा कि, मेरा प्लाट सुरक्षित है। उस पर किसी ने अतिक्रमण नहीं किया है। सागरवाणी ने इस संबंध में भाजपा नेता वीरेंद्र पाठक से भी संपर्क किया। उनका कहना था कि मेरी कॉलोनी में 43 प्लाट थे। जिन पर आवास बन चुके हैं। सीधे शब्दों में वहां कब्जा या अतिक्रमण जैसी कोई स्थिति नहीं है। इस तरह के अर्नगल आरोप लगाना ठीक नहीं है। 
मैं मानहानि का दावा करूंगा, सारे आरोप झूठे
मुझ पर या पत्नी पर लगाए सारे आरोप झूठे हैं। इसकी पुष्टि संबंधित जमीन या प्लाट के मालिकों से की जा सकती है। यह सब किसके इशारे पर हो रहा है। मैं जानता हूं। मैं इस मामले में धनौरा के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई करूंगा।
हीरासिंह राजपूत, अध्यक्ष, जिला पंचायत, सागर मप्र
04/08/2025



