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भूपेंद्रसिंह और गोविंदसिंह बगैर नाम लिए हो रहे हमलावर

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सागर। पूर्व मंत्री व खुरई से वरिष्ठ विधायक भूपेंद्रसिंह और राज्य के केबिनेट मंत्री गोविंदसिंह राजपूत के बीच तल्खी बढ़ती ही जा रही है। दोनों बीते 72 घंटे से एक-दूसरे पर जुबानी हमले बोल रहे हैं। आज गुरुवार को केबिनेट मंत्री राजपूत ने पूर्व मंत्री सिंह के दो दिन पुराने बयान पर मीडिया के समक्ष प्रतिक्रिया दी। सिंह की तरह राजपूत ने भी उनका नाम लिए बगैर अपनी बात कही। बहरहाल बुंदेलखंड के इन दिग्गज नेताओं के बीच छिड़ी इस सियासी जंग की वजहात और कयासों पर बहसबाजी शुरु हो गई है। इस हमलेबाजी की खास बात ये है कि सिंह अपना मोर्चा खुद संभाले हुए हैं। वे विधानसभा के सदन में बयानबाजी करने से लेकर समाचार-मीडिया संस्थानों के स्टुडियो में इंटरव्यू देकर अपनी बात रख रहे हैं। वहीं केबिनेट मंत्री राजपूत खुद तो बोल ही रहे हैं साथ ही अपनी गुड लिस्ट में शामिल लोगों से लेकर परिवारजनों को भी मैदान उतारे हुए हैं। हालांकि ये लोग सीधे तौर पर सिंह के आरोप-प्रत्यारोप के जवाब नहीं दे रहे हैं। लेकिन उनके क्रिया-कलापों से साफ जाहिर हो रहा है कि वे सभी केबिनेट मंत्री राजपूत की तरफ से हमले के लिए अलग-अलग बुर्ज पर तैनात किए गए हैं। उदाहरण के लिए मप्र राज्य बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि भूपेंद्र जी से अपेक्षा है कि आपके जिले सागर में धर्मांतरण के लिए कुख्यात सेंट फ्रांसिस मिशनरी संस्था के स्कूल इत्यादि के नाम पर सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन पर से अवैध कब्जा हटाने के लिए आप आवाज बुलंद करेंगे। दुर्भाग्य से आपके मंत्री रहते अफसरों की लापरवाही से यह विषय सुलझ नहीं सका था। इसी तरह का एक दूसरा अटैक, राजपूत के अग्रज और जिला पंचायत अध्यक्ष हीरासिंह राजपूत की दिल्ली यात्रा के रूप में हुआ। जिपं अध्यक्ष हीरासिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ढा से मुलाकात की। खास ये है कि इस मुलाकात में उनके साथ कांग्रेस से भाजपा में आए खुरई के पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे भी शामिल थे। बताया जा रहा है कि इन्हीं चौबे की बीजेपी में इंट्री को लेकर भूपेंद्रसिंह असहमत हैं। जिसको लेकर वे दीवाली से लेकर कम से कम क्रिसमस तक बयान दागने की तैयारी में हैं।

भूपेंद्रसिंह बोले… उनकी औकात ही क्या है जो मेरा नुकसान कर पाएंगे

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा द्वारा निजी लड़ाई बताने वाले बयान पर भूपेंद्र सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वीडी शर्मा जी को पार्टी में आए हुए 5 से 7 साल हुए हैं, वे इससे पहले एबीवीपी में काम करते थे। शर्मा का ये बयान घोर आपत्तिजनक है। मैंने उनकी अध्यक्षीय गरिमा का ध्यान रखते हुए प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन उन्होंने पद की गरिमा का ध्यान नहीं रखा। चाहता तो मैं भी जवाब दे सकता था। मेरी किसी से कोई निजी लड़ाई नहीं हैं, मेरी लड़ाई भाजपा के कार्यकर्ताओं की लड़ाई है। मैं तो आज चाहूं तो मेरे बहुत अच्छे संबंध हो जाएं। मैं उनकी जय-जयकार करने लगूं। मेरी कौन सी निजी लड़ाई है। उन्होंने मेरा क्या बिगाड़ा। उनकी तो इतनी औकात भी नहीं है कि वह मेरा कोई नुकसान कर पाएं। गोपाल भार्गव और मैंने सागर जिले में पार्टी को खड़ा किया है। भार्गव जी और मैं फिर साथ आए हैं तो कार्यकर्ताओं में उत्साह जगा है कि उनका नुकसान कोई नहीं कर पाएगा। फिर आगे पूर्व मंत्री सिंह ने कहा है कि एक मंत्री सागर में भाजपा को खत्म करने में लगा हुआ है।  भूपेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसे लोगों को हम स्वीकार नहीं कर सकते जिन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किए थे। वे लोग अब हमारी पार्टी में आकर फिर से कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित कर रहे हैं। वे फिर बोले कि, ये मामला सागर जिले का है, वहां दो लोगों को लेकर मेरी आपत्ति पहले भी थी और आज भी है। सबसे ज्यादा भाजपा के कार्यकर्ताओं पर अत्याचार इन्हीं दो लोगों ने किए हैं। ये कौन दो लोग हैं, इसकी जानकारी सभी को है। प्रशासन उनकी बात सुन रहा है जो कांग्रेस से आए हैं। प्रशासन को पता है कि कब किसकी सुनना है। प्रशासन जिनके इशारे पर काम कर रहा है।  वे नहीं चाहते कि भाजपा के मूल कार्यकर्ता मजबूत हों। वे तो कांग्रेस के लोगों को ही मजबूत कर रहे हैं। वे खुद भाजपा में कब तक रहेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

राजपूत बोले …. मतलब आप पार्टी से ऊपर हो गए हैं

आज केबिनेट मंत्री राजपूत ने कहा कि मैं, भारतीय जनता पार्टी की तीन कठिन सीमाएं पार कर चुका हूं। मैंने भाजपा से पहला चुनाव 41 हजार मतों से जीता। दूसरा चुनाव भी जीता। लोकसभा चुनाव में मेरी विधानसभा में 86 हजार वोटों से भाजपा जीती। दूसरी बात जब मैं भाजपा में आया था तो राष्ट्रीय नेतृत्व में मैंने भाजपा ज्वाइन की थी। तब प्रदेशाध्यक्ष व शीर्ष नेतृत्व मौजूद था। जब मैं राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में भाजपा में ज्वाइन हुआ। उसी समय से मैं मेहनत कर रहा हूं। काम कर रहा हूं। लेकिन सागर के एक विधायक जब भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पर टिप्पणी कर सकते हैं….. भाजपा एक बहुत ही अनुशासित पार्टी है। यहां ये बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि प्रदेशाध्यक्ष 5 साल पहले ही अभाविप से आए हैं। माने आप अभाविप से आए लोगों को महत्व ही नहीं दे रहे। जबकि यहीं से राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ढा और राजनाथ सिंह भी आए हैं। कहने का मतलब आप पार्टी से ऊपर हो गए हैं। ऐसे व्यक्ति की तरफ पार्टी और शीर्ष नेतृत्व देख रहा है। मुझे ज्यादा टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। कांग्रेसियों को भाजपा में लाने के सवाल पर राजपूत बोले कि मैं उन्हें नहीं लाया। जब चुनाव हो रहे थे कि तब पार्टी के एजेंडे में था कि पार्टी मेें मप्र से सबसे अधिक सदस्यता दूसरी पार्टियों से रहे। उनमें कांग्रेस से भी शामिल हुए। इसी तर्ज पर सागर से एक पूर्व विधायक भी भाजपा में शामिल हुए।…. लेकिन जो व्यक्ति शीर्ष नेतृत्व से ऊपर हो गया हो। वह विचारणीय है। कांग्रेसियों को स्वीकार नहीं करने वाली बातें भाजपा का शीर्ष नेतृत्व देख-सुन रहा है। मुझे इस पर कोई टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है।

19/12/2024

 

 

 

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