अपराध और अपराधीविविधा

इक्वाटास बैंक ने 22 कैरेट सोने का बताकर बेचे थे 8 कैरेट के जेवरात, आयोग ने कहा वापस लेकर पूरी रकम लौटाओ

भोपाल स्थित ब्रांच ने दिए थे जेवरात, सागर में चेक कराए तो जेवरों पर सोने का पत्ता चढ़ा मिला

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सागर। इक्वाटास स्माल फाइनेंस बैंक द्वारा सागर निवासी एक व्यक्ति को 22 कैरेट के सोने के जेवरात बताकर 8  कैरेट के जेवर थमा दिए। मामले का खुलासा हुआ तो जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक प्रबंधन के इस कार्य को दोषयुक्त वस्तु को विक्रय करने का मामला मानते हुए इसे अनुचित प्रथा बताया। परिवादी की ओर से पैरवी करने वाले उपभोक्ता मामलों के जानकार वकील पवन नन्होरिया ने बताया कि परिवादी दिनेश सिंघई निवासी बड़ा बाजार गांधी चौक वार्ड, सागर के अनुसार, इक्वाटास स्मॉल फाइनेंस बैंक से 22 अगस्त 2023 को समाचार पत्र बिज़नस स्टैण्डर्ड में एक विज्ञापन गोल्ड ऑक्सन नोटिस प्रकाशित कराया था। जिसमें बताया गया था कि बैंक प्रबंधन भोपाल में मौजूद कुछ जेवरात की नीलामी करना चाहता है। लेकिन किसी कारणवश यह नीलामी कैंसिल हो गई। तब सागर स्थित इक्यूटॉस स्माल फायनेंस बैंक के क्लस्टर मैनेजर शैलेन्द्र तिवारी परिवादी सिंघई से 31 अगस्त को संपर्क किया। अगर आपको उक्त आभूषण खरीदना हो तो मैं आपको बिना ऑक्शन के उक्त आभूषण खरीदवा सकता हूं। परिवादी को क्लस्टर मैनेजर ने उक्त आभूषणों के बारे में जानकारी दी। जिसमें 4 चार सोने की चूड़ियां वजन 107.490 ग्राम एवं 1 एक सोने का पेंडल वजन 12.650 ग्राम उक्त संपूर्ण गोल्ड आभूषण चार सोने की चूडियां एवं एक सोने का पेंडल कुल वजन-120.140 ग्राम 22 कैरेट के सर्टिफाईड होना बताया था। जिसकी कुल कीमत 5,47,960/-रुपए विपक्षी बैंक ने रखी गयी थी। परिवादी ने उक्त आभूषणों के पसंद आने पर खरीदने की सहमति दे दी। परिवादी ने जेवरातों की सारी राशि आरटीजीएस के जरिए बैंक में जमा करा दी। इसके बाद भोपाल जाकर उक्त जेवरात रिसीव कर लिए। इस दौरान इक्वाटास बैंक के मैनेजमेंट ने बताया कि उक्त गहनों पर 91.6 प्रतिशत शुद्धता की हॉलमार्क वाली सील लगी है। इसके बाद मेरा पक्षकार सागर आ गया। यहां आकर उसने यह जेवरात अपने मित्र अंकित मुनोत जो कि शहर के प्रतिष्ठित सराफा व्यवसायी हैं, उनको दिखाए। तो अंकित ने बताया कि इन आभूषणों पर जो हालमार्क की सील लगी है। वह फर्जी है। यह जानकारी मिलते ही दिनेश सिंघई ने एक्वाटॉस बैंक के प्रबंधन से संपर्क कर वस्तुस्थिति से अवगत कराया। इसके बाद उन्होंने चार चूडियों में से एक चूडी की जाँच बालाजी गोल्ड टेस्टिंग एन्ड लेजर सोल्डरिंग सेन्टर सागर से करायी और उसका टंच कराया तो परिवादी को पता चला कि उक्त सोने की चूडियों गोल्ड 35.01 कुल कैरेट 8.419 है। तब परिवादी ने सुनार से उक्त चूडी को चैक कराया तो पता चला कि उक्त चूडी में अंदर चांदी का तार है और उपर सोने का पत्ता चढ़ा हुआ है। इसके बाद परिवादी ने तत्काल पुलिस थाना मोतीनगर सागर व पुलिस अधीक्षक सागर को 25 सितंबर को शिकायत कर दी। आयोग के समक्ष बैंक प्रबंधन को तलब किया गया। जवाब में उन्होंने कहा कि परिवादी ने असली गहने छिपाकर हुबहु नकली गहने रखवा दिए। जबकि हमारी ओर से उन्हें 22 कैरेट के ही जेवरात दिए गए थे। जवाब में परिवादी की तरफ से वकील नन्होरिया ने तर्क दिया कि अगर नए जेवरात बनवाए गए हैं तो वह पुराने जैसे कैसे हो सकते हैं। इसके बावजूद आप चाहें तो किसी दूसरे हॉलमार्क जांच एजेंसी से रिपोर्ट ले लें। जवाब में इंदौर की जांच एजेंसी ने भी कहा कि उक्त हॉलमार्क फर्जी है। जेवरात में सोने की मात्रा 8 कैरेट से अधिक नहीं है। इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने माना कि बैंक द्वारा परिवादी को जो 22 कैरेट गोल्ड के हालमार्क सील वाले आभूषण दिए गए वे नकली हैं और बैंक परिवादी को उक्त आभूषण वापस लेकर उनकी पूरी कीमत-5,47,960/- रुपए,  15 हजार रुपए मानसिक व शारीरिक क्षति के रूप में और 2000 रु. वाद व्यय के रूप में अदा करे।

09/12/2024

 

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