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राजनैतिक स्वार्थों में गुम हो रहा बरोदिया नौंनागिर का सच

ताजा विवाद के पीछे छेड़खानी के मामले का राजीनामा नहीं बल्कि 22/5/2021 कोरोना काल की उस चर्चित घटना का राजीनामा कराने का विवाद है जिसमें दबंग कुरैशी बंधुओं आमिर, इमरान, सोहेल, फैसल, अरमान, शब्बीर कुरैशी के साथ मृतक लालू अहिरवार के सगे भाई विष्णु और चाचा राजेंद्र अहिरवार भी अप क्रमांक 132/2021 में धारा 307,147,148,107,25/27 आर्म्स एक्ट के आपराधिक मामले में आरोपी हैं। इस चर्चित प्रकरण में इस गिरोह ने खेत की मेंढ़ के विवाद पर सशस्त्र हमला कर सरपंच विक्रम सिंह की गोली मार कर हत्या की कोशिश की थी। उस घटना की रात भी गांव में दोनों पक्षों में घंटों तक पथराव, फायरिंग की घटना हुई थी। घायलों को हास्पिटल ले जा रहे 108 वाहन के चालक प्रशांत सोनी को भी आरोपियों ने हमला करके घायल कर दिया था। सभी को स्मरण होगा कि बरोदिया नौंनागिर में वर्ष 2016 में एक ओबीसी समाज की युवती का अपहरण, बलात्कार कर जलाकर मार डालने की..........

सागर वाणी डेस्क। 9425172417
सागर। बरोदिया नौंनागिर में युवक की हत्या की घटना एक हथियार बंद हमलावर गुंडे के खिलाफ तकरीबन पूरे गांव के सामूहिक प्रतिरोध की घटना की तरह देखा जाना चाहिए। कुछ तथ्य रेखांकित करने योग्य हैं। पहला यह कि घटना में एक हजार से अधिक लोग शामिल थे, इसकी पुष्टि मृतक की चाची कविता के बयान से ही हो रही है। दूसरा तथ्य यह कि हमले में  सभी जाति वर्ग के लोग शामिल थे। तीसरा तथ्य यह कि इस घटना के सीक्वेंस में छेड़खानी की किसी घटना का मामला दर्ज नहीं है जिसके राजीनामे की बात की जा रही है। चौथा तथ्य यह भी है कि मृतक, उसके दोनों भाई व चाचा का लंबा चौड़ा आपराधिक रिकॉर्ड तीनों पर कुल 27 आपराधिक प्रकरण हैं।भोपाल एसटीएफ तक ने इन पर मामला दर्ज किया है। यह आपराधिक रिकॉर्ड यह सोचने को बाध्य करता है कि दरसल गांव का दबंग कौन है।  गांव के सरपंच का परिवार या फिर मृतक का परिवार।… पुरानी रंजिश एक व्यापक शब्द है जिसमें अतीत के कई वर्षों का विवरण शामिल रहता है। तो  इस रंजिश की परतें हम नीचे खोलते हैं ताकि घटना में हो रही राजनीति के परे तथ्यों पर प्रकाश डाला जा सके।
ताजा विवाद कथित छेड़खानी का नहीं है !
 ताजा विवाद के पीछे छेड़खानी के मामले का राजीनामा नहीं बल्कि 22/5/2021 कोरोना काल की उस चर्चित घटना का राजीनामा कराने का विवाद है जिसमें दबंग कुरैशी बंधुओं आमिर, इमरान, सोहेल, फैसल, अरमान, शब्बीर कुरैशी के साथ मृतक लालू अहिरवार के सगे भाई विष्णु और चाचा राजेंद्र अहिरवार भी अप क्रमांक 132/2021 में  धारा 307,147,148,107,25/27 आर्म्स एक्ट के आपराधिक मामले में आरोपी हैं। इस चर्चित प्रकरण में इस गिरोह ने खेत की मेंढ़ के विवाद पर सशस्त्र हमला कर सरपंच विक्रम सिंह की गोली मार कर हत्या की कोशिश की थी। उस घटना की रात भी गांव में दोनों पक्षों में घंटों तक पथराव, फायरिंग की घटना हुई थी। घायलों को हास्पिटल ले जा रहे 108 वाहन के चालक प्रशांत सोनी को भी आरोपियों ने हमला करके घायल कर दिया था। सभी को स्मरण होगा कि बरोदिया नौंनागिर में वर्ष 2016 में एक ओबीसी समाज की युवती का अपहरण, बलात्कार कर जलाकर मार डालने की वारदात हुई थी जिसमें आमिर नामक युवक आरोपी था। बलात्कार के बाद आग लगाकर जला डालने की इस जघन्य हत्या के इस हौलनाक प्रकरण में जनाक्रोश को देखते हुए  प्रशासन ने आरोपी कुरैशी बंधुओं के घर गिराने की कार्रवाई की थी। ताजी घटना में सरपंच सहित अन्य आरोपियों के घर गिराने की मांग हत्या सह बलात्कार की घटना में घर गिराने की घटना के प्रतिशोध स्वरूप है। 
सारी वारदातों में अल्पसंख्यक परिवार का रोल
कुरैशी बंधुओं और मृतक लालू अहिरवार के गिरोह का गांव में आतंक और इलाके में गोकशी, चोरी, मारपीट कर दहशत फैलाने की वारदातें कमलनाथ सरकार के 15 महीनों में खास तौर पर बढ़ गई थीं। स्पष्ट रूप से गैंग को कांग्रेस का संरक्षण मिल रहा था।इस गिरोह ने हत्या की एक अन्य वारदात बरोदिया नौंनागिर गांव के समीप बनहट की रेलपटरियों पर की जिसमें एक युवक की हत्या करके उसे उसकी मोटर साइकिल सहित पटरियों पर रख दिया गया था। इन दोनों वारदातों में एक स्थानीय अपराधी पृष्ठभूमि का अल्पसंख्यक परिवार शामिल था। इस परिवार के सात आठ दबंग भाई हैं जो एक गिरोह के रूप में काम करते हैं।  हत्या, बलात्कार, गोकशी, तार चोरी, कुओं की मोटरें , मशीनें चुराना इस गिरोह के काम हैं। 25 अगस्त की घटना मृतक लालू , लालू का सगा भाई विष्णु अहिरवार और चाचा राजेंद्र अहिरवार इस कुरैशी गिरोह के ही सक्रिय सदस्य हैं। कुरैशी बंधुओं के आपराधिक प्रकरणों की फेहरिस्त तो बहुत बड़ी है।ताजी घटना में मृत हुए लालू अहिरवार पर 7 आपराधिक मामले, उसके चाचा राजेंद्र अहिरवार पर कुल 13 मामले और मृतक के सगे भाई विष्णु अहिरवार पर 7 मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या की कोशिश, सशस्त्र होकर दहशत फैलाने, वाहन चोरी, खेतों की मोटरों और कीमती सामानों की चोरी शामिल है। इनकी वारदात का केंद्र तो बरोदिया नौंनागिर है लेकिन इनका अपराध क्षेत्र भोपाल, खुरई और राहतगढ ब्लाक तक है। बरोदिया नौंनागिर का दूसरा तबका सामान्य खेतीहर नागरिकों, कामगारों व श्रमिकों का है जो मेहनत से अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं। इनमें सभ्रांत मेहनतकश मुसलमान परिवार, अहिरवार सहित ग्राम के सभी जाति समूह हैं। इस संभ्रांत तबके का  नेतृत्व सरपंच विक्रम और कोमल सिंह का परिवार करता है जो सैकड़ों वर्षों से वहां की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है। यह परिवार अपने पुश्तैनी दायित्व के अनुरूप आज स्वयं व अपने नागरिकों की अपराधियों से रक्षा करने का संघर्ष कर रहा है। 
क्या इस तरह कांग्रेस अपनी जमीन बनाएगी ?
खुरई विधानसभा क्षेत्र में अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही कांग्रेस तथ्यों और जमीनी सच को जाने बगैर हर मामले को राजनैतिक और जातिगत एंगिल से ले रही है। प्रदेश के चुनावी वातावरण में कांग्रेस इन घटनाओं को मैग्नीफाई करने के बजाए एप्लीफाई करने में जुट जाती है। बरोदिया नौंनागिर के घटनाक्रम की वास्तविक रिपोर्टिंग राजनैतिक शोर शराबे में दब कर रह गई। सबको वोटों की तलाश है सच कोई नहीं जानना चाहता। छेड़खानी और निर्वस्त्र करने के स्वरचित मिथ्या आरोप ट्रेड मार्क बना कर पेश हो रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में छेड़खानी की वारदात कभी हुई ही नहीं, पेशबंदी और काऊंटर प्रकरण बनाने के लिए नारी के शील का दुरुपयोग हुआ। ताजी घटना को एक यूट्यूब चैनल मणिपुर जैसी घटना बता रहा है, जबकि निर्वस्त्र या बेपर्दा करने की घटना के एक पक्षीय मुंहजबानी कथन मिलते हैं जिनका प्रयोजन मामले को जातिगत व राजनैतिक मोड़ देना है। मसलन कमलनाथ की अहिरवार परिवार की बेटी से टेलीफोनिक बातचीत का हिस्सा देखें जिसमें कमलनाथ अपनी तरफ से लड़की के मुंह में शब्द डाल रहे हैं कि सब भूपेंद्र के आदमी थे, लड़की कमलनाथ के शब्दों को दोहरा देती है। इसी वीडियो में लड़की बताती है कि 70 लोग थे जब उसके अनुसार मां को कथित तौर पर बेपर्दा किया गया। अब मृतक की सगी चाची कविता का वीडियो बयान सुनिए। वह साफ तौर पर कह रही है कि एक हजार लोगों ने उसके भतीजे और पति की तलाश में उसके घर पर हमला किया। यानि भीड़ लालू के साथ उसके चाचा राजेंद्र और भाई विष्णु को भी खोज रही थी जिनकी क्राइम लिस्ट हमने बताई है। फिर कुल ढाई हजार की जनसंख्या के गांव में जब किसी हमले में एक हजार लोग शामिल हों तब समझा जा सकता है कि यह वस्तुत: जनाक्रोश का विस्फोट था जिसका लक्ष्य एक परिवार के तीन लोग ही थे। ताजे घटनाक्रम में पहला हमलावर कौन था यह भी महत्वपूर्ण है। तथ्य बताते हैं कि एक दूकान पर बैठे सरपंच पति विक्रम सिंह पर भरपूर प्रहार किया जिसको रोकने में एक सोनी समाज के व्यक्ति की अंगुलियां कटीं। और फिर इस अचानक हमले की प्रतिक्रियावश भीड़ ने इकट्ठा हो कर मृतक और उसके परिजनों पर हमला किया। 
मंत्री के साथ फोटो- पत्र वायरल किए जा रहे
इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय विधायक व केबिनेट  मंत्री भूपेंद्र सिंह के साथ ताजा घटनाक्रम के आरोपियों की तस्वीर व पत्रों को वायरल किया जा रहा। जिसके संबंध में मंत्री खेमे का कहना है कि जिन आरोपियों की तस्वीरें और पत्र मंत्री भूपेंद्र सिंह के साथ जोड़ कर जारी किए जा रहे हैं। वह बहुत सामान्य है। साधारण समझ वाला व्यक्ति भी ये जानता है कि श्री सिंह सार्वजनिक जीवन जी रहे एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं। उनका पत्र लिखना, ओहदा देना शर्मिंदगी के बजाए एक जनप्रतिनिधि के दायित्व की बात होती है।… बाकी कानून अपना काम कर ही रहा है।
सोशल मीडिया से साभार …….

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