पुलिस के खाली हाथ: 15 दिन बाद भी पूर्व डीएसपी जैन अंडरग्राउंड, डॉ. नीलम भी गायब !
सार्वजनिक प्रसाधन में लगे पोस्टर और दक्षिण भारत में शरण की चर्चा

सागर। प्रसिद्ध जैन मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी प्रसारित किए जाने के हाई-प्रोफाइल मामले में नामजद आरोपी सागर निवासी पूर्व डीएसपी एवं ब्रह्मचारिणी डॉ. रेखा जैन, समीर जैन और राहुल जैन को अंडरग्राउंड हुए 15 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस अब तक उनकी सटीक लोकेशन ट्रेस नहीं कर पाई है।इस बीच एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। भाग्योदय तीर्थ अस्पताल क्षेत्र के सूत्रों के अनुसार शिशु रोग विशेषज्ञ ब्रह्मचारिणी डॉ. नीलम जैन भी इन दिनों अंडरग्राउंड हैं। हालांकि डॉ. नीलम जैन के विरुद्ध इस ताजा घटनाक्रम को लेकर कोई भी अपराध पंजीबद्ध नहीं है। डॉ. रेखा जैन और डॉ. नीलम जैन, भाग्योदय अस्पताल के पीछे स्थित एक कॉलोनी में साथ निवास करती हैं, जहां इन दिनों ताला लटका हुआ है। सूत्रों का दावा है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद इन सभी लोगों को नागपुर में जैन समाज के एक आयोजन में देखा गया था। बताया जा रहा है कि वहां से ये लोग दक्षिण भारत के एक प्रसिद्ध शहर में पहुंच गए हैं, जहां इन्होंने समाधिस्थ पूज्य आचार्य श्री के प्रभाव वाले एक जैन तीर्थ स्थल में शरण ली है। इसके साथ ही ये लोग सागर में अपने परिचितों के माध्यम से अशोकनगर सेशन कोर्ट सहित हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत लेने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रसाधन गृह में पोस्टर चस्पा किए
सागर शहर में मनोहर टॉकीज के सामने स्थित पब्लिक टॉयलेट में अज्ञात लोगों द्वारा डॉ. रेखा जैन सहित तीनों आरोपियों के रंगीन फोटो वाले पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। चूंकि इस बात की संभावना बेहद कम है कि ये तीनों आरोपी सागर में ही कहीं छिपे हों, ऐसे में सार्वजनिक प्रसाधन जैसी जगह पर पोस्टर लगाया जाना कथित तौर पर दो धड़ों में बंटे जैन समाज के ही किसी एक धड़े की आपसी खींचतान या विरोध की ओर इशारा कर रहा है।
फर्जी सिम से आपत्तिजनक मैसेज का आरोप
श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी, जिला अशोकनगर की शिकायत पर बीते 3 जून को अशोकनगर कोतवाली थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अशोकनगर कोतवाली पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 299, 352 और 353(2) के तहत दर्ज किया। शुरुआती जांच और साइबर सेल के तकनीकी विश्लेषण के दौरान पुलिस ने संदेह के आधार पर मुस्लिम तबके के तीन युवकों को हिरासत में लिया था, परंतु विस्तृत पूछताछ के बाद उनकी संलिप्तता न पाए जाने पर उन्हें छोड़ दिया गया। जब साइबर सेल ने व्हाट्सएप ग्रुप्स के संदेशों और तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया, तो इस विवाद के पीछे कुछ अन्य चेहरे बेनकाब हुए। विवेचना के दौरान सागर निवासी पूर्व डीएसपी डॉ. रेखा जैन, समीर जैन और राहुल जैन की कथित संलिप्तता के सबूत मिलने पर पुलिस ने इन्हें मामले में नामजद किया। अशोकनगर एसपी राजीव कुमार मिश्रा के निर्देश पर गठित विशेष टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 5 से अधिक जिलों (सागर, बीना, दमोह, जबलपुर और ललितपुर) में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। बहरहाल यह मामला केवल एक कानूनी या आपराधिक प्रकरण नहीं रह गया है, बल्कि इसने जैन समाज के भीतर संवाद की मर्यादा और धार्मिक आस्था से जुड़े कई गंभीर प्रश्नों को जन्म दे दिया है। जैन समाज के एक बड़े वर्ग का आरोप है कि यह मामला सिर्फ एक प्रतिष्ठित संत पर व्यक्तिगत टिप्पणी का नहीं है, बल्कि यह दो समुदायों के बीच वैमनस्यता, अविश्वास और सामाजिक तनाव पैदा करने की एक गहरी बैकएंड साजिश का हिस्सा है। इस मामले में लगाई गई धारा 299 मुख्य रूप से किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने के इरादे से किए गए कृत्यों (चाहे वे वचन, लिखित शब्द या संकेत हों) से संबंधित है। इसमें दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा और आर्थिक जुर्माने का प्रावधान है।
कौन हैं पूर्व डीएसपी ब्रह्मचारिणी डॉ. जैन
डॉ. रेखा जैन ने मध्य प्रदेश पुलिस में एक जिम्मेदार अधिकारी के रूप में लंबी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने वीआरएस लेकर सांसारिक जीवन से दूरी बनाकर ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर लिया। वे लंबे समय से जैन धर्म, अध्यात्म और समाज कल्याण की गतिविधियों में सक्रिय थीं, जिसके कारण उनके खिलाफ ऐसा मामला दर्ज होने से समाज का एक धड़ा स्तब्ध है। जैन धर्म का मूल आधार अहिंसा, अनेकांतवाद, संयम और आत्मचिंतन है। अनेकांतवाद का सिद्धांत सिखाता है कि सत्य के कई पहलू हो सकते हैं और उन्हें विभिन्न दृष्टिकोणों से समझा जाना चाहिए। जैन आचार में वाणी पर नियंत्रण को सर्वोच्च महत्व दिया गया है। संतों के प्रति अगाध श्रद्धा के बीच यदि कहीं मतभेद की स्थिति बनती भी है, तो वहां मर्यादित संवाद की ही अपेक्षा की जाती है। फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने और अदालत का फैसला आने से पूर्व किसी को भी वैधानिक रूप से दोषी नहीं माना जा सकता। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा आम जनता से अपील कर चुके हैं कि वे सोशल मीडिया का उपयोग पूरी जिम्मेदारी से करें और किसी भी धार्मिक या प्रतिष्ठित व्यक्तित्व के खिलाफ भ्रामक व आपत्तिजनक टिप्पणी करने से बचें।
19/06/2026….9425172417



