आबकारी : 40% दाम घटाने के बाद भी खाली हाथ, ठेकेदारों की ‘सिंडिकेट’ ने फंसाया पेंच

सागर। जिले के शराब नीलामी में इन दिनों “हाथी निकल गया, पूंछ बाकी है” वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। नीलामी प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव पर आकर ऐसी अटकी है कि आबकारी विभाग के माथे पर बल पड़े हुए हैं। 12 दिन बीतने और शासन के निर्देश पर कीमतों में 40% तक की भारी कटौती के बावजूद, ठेकेदार टस से मस नहीं हो रहे हैं। विभाग अब भी 5 दुकानों को नीलाम करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
638 करोड़ रुपए के लक्ष्य के करीब… फिर भी दूर
आबकारी विभाग ने पिछले 2 महीनों में नीलामी के 18 चरण पूरे किए हैं। जिले के लिए कुल 638 करोड़ रु. रुपये का राजस्व लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से 585 करोड़ रु. की कमाई सुनिश्चित हो चुकी है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में 53 करोड़ रु. अधिक तो है, लेकिन शेष 5 दुकानों के कारण विभाग लक्ष्य से पिछड़ता दिख रहा है।
कीमतें घटती रहीं, ठेकेदार ने नहीं बढ़ाई बोली
शासन ने ठेकेदारों को लुभाने के लिए 5-5 प्रतिशत करके अब तक कुल 15% और कुल मिलाकर 40 प्रतिशत राशि कम कर दी है, लेकिन ठेकेदारों ने अपनी बोली में 1 रुपये का भी इजाफा नहीं किया। यहाँ ठेकेदारों का एक “अलिखित गठबंधन” (सिंडिकेट) साफ नजर आ रहा है। जिस दुकान पर एक फर्म ने बोली लगा दी है, वहां कोई दूसरा ठेकेदार प्रतिस्पर्धा के लिए सामने नहीं आ रहा है। ठेकेदार इन दुकानों को इनके आरक्षित मूल्य ( आरपी) के महज 40 से 82% दाम पर ही खरीदना चाह रहे हैं। स्थिति यह है कि-
कर्रापुर: इस दुकान का आरक्षित मूल्य 10.35 करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन ठेकेदार समूह केएसआर इसे मात्र 1.99 करोड़ रु.(करीब 18%) में हासिल करना चाहता है। मधुकर शाह वार्ड: सरकारी कीमत 14.63 करोड़ रु. है, जबकि ‘शर्मा एसोसिएट्स’ ने 41% कम यानी 6 करोड़ रु. की बोली लगाई है। गुजराती बाजार: स्टेशन के सामने की इस दुकान की कीमत 10.35 करोड़ रु. है, पर बोली 5.69 करोड़ रु. पर अटकी है। जमुनिया: 9.13 करोड़ रु. की दुकान के लिए ठेकेदार जंडेलसिंह एंड कंपनी ने 5.11 करोड़ रु. की ही वैल्यू लगाई है। गढ़ाकोटा-1: इसकी सरकारी कीमत 8.43 करोड़ रु. है, जिसके बदले आरएस रिटेल्स ने 5.06 करोड़ रु. का ऑफर दिया है।



