जैनिज्म में इतना गंदला विरोध प्रदर्शन शायद ही दुनिया में कहीं हुआ हो !
विरोध प्रदर्शन में सुअर के बच्चे भी किए शामिल

सागर। हालात-ए- जैनिज्म बयां करने के लिए ये तस्वीरें बहुत हैं। फिर भी जिनके चश्मे का नंबर निकट दृष्टि दोष सेगमेंट में + 2 से ज्यादा है। उनके लिए बारीक कर बता दें कि ये फोटो यूपी के मड़देवरा/ महरौनी के हैं। जहां सागर निवासी ब्रह्मचारिणी डॉ. रेखा जैन, संजीव कटन्गी के खिलाफ उन्हीं के समुदाय के कुछ लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। फोटो में दिख रहे फ्लेक्स वाले विरोध प्रदर्शन में समाज की ब्रह्मचारिणी डॉ. रेखा जैन और संजीव कटंगी बड़ी ही घिनौनी तुलनाएं की गई हैं। सागरवसी होने के नाते बता दूं कि डॉ. जैन, परम पूज्य 108 समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज और उनके मुनि संघ के बारे में अनाप-शनाप पत्राचार करने वालों के खिलाफ लंबे समय से पताका उठाए हैं।
संजीव कटंगी के बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं है इसलिए उनके बारे में ABCD भी नहीं लिखना बनता है। खैर अब…. बात विरोध प्रदर्शन की कर लें। नगर निगम के फिल्टर्ड पानी को भी छानकर पीने वाले समुदाय के लोग डॉ. रेखा व संजीव के प्रतीक में सुअर का बच्चा गोद में लिए हैं। जबकि ये वो जानवर है जिसे तकरीबन हरेक समुदाय ने घिन्न का पर्याय माना है। इसी फोटो/ पोस्टर में डॉ. रेखा और संजीव को लेकर कुछ ऐसी उपमाएं दी हैं कि अनथऊ करने के पहले ही मतली आ जाए। इस सब को देख आप भी मान लीजिए कि दुनिया में इससे घिनौना विरोध प्रदर्शन कहीं और नहीं हुआ होगा। विरोधियों की तुलना जहां कुष्ठ रोगी आदमी- औरत, खुजली वाले कुत्ता- कुतिया, नाली का बिलबिलाता कीड़ा और विष्ठा में रेंगती सफेद पटार से की गई हो।
जैन- अजैन के चश्में से देखें तो यह बेहद शर्मनाक और बीमार मानसिकता को जाहिर करता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आप गुरु की भक्ति में कोई कसर मत छोड़ो। उनकी प्रतिष्ठा पर बात आए तो जीवन-मरण का प्रश्न इग्नोर कर दो। लेकिन यह सब क्या है…. इससे हासिल क्या होगा। क्या आप इस गंदले विरोध प्रदर्शन को अपने परम शुच्य गुरुवर को दिखा पाओगे। बस सवाल यही है और रहेगा।
हां जाते….. जाते डॉ. रेखा जैन के साथ किन्ही अननोन टाइप योगेश नाम के शख्स के पुतले संग जूतम-पैजार की तैयारी है। शहर में इस “महान कार्यक्रम” के प्रचार-प्रसार के फ्लेक्स लगाए ऑटो टिड्डी से घूम रहे हैं। बाकी आप सब समझ लें। हृदय की बात है। आज मन बहुत क्षुब्ध है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब नश्वर दुनिया में कोई रास्ता नहीं बूझता तब गुरु राह दिखाते हैं। लेकिन यहां तो उन्ही के नाम पर गंदगी, मलच्छ फैलाया जा रहा है। सवाल ये कि अब सीधा-सादा श्रद्धालू कहां जाए ? आप ही बताइए… !
22/08/2025



