लोकायुक्त पुलिस की आधी-अधूरी विवेचना के चलते सहायक समिति प्रबंधक बरी
विशेष न्यायालय ने लोकायुक्त पुलिस की विवेचना के दावे-तथ्यों को नहीं किया स्वीकार

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सागर। आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सागर आलोक कुमार मिश्रा ने एक सहायक समिति प्रबंधक के खिलाफ दर्ज केस में उसे बरी कर दिया है। अभियुक्त की ओर से पैरवी एड. ब्रजकिशोर यादव ने की। मामला इस तरह से है कि जुलाई 2018 में लोकायुक्त कार्यालय, भोपाल को एक गुमनाम पत्र मिला। जिसमें निम्मू सेन उम्र 57 साल सहायक समिति प्रबंधक गांव मेहर थाना बांदरी जिला सागर पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए थे। इस पत्र के आधार पर लोकायुक्त कार्यालय सागर ने निम्मू के खिलाफ जुलाई 1987 से जुलाई 2018 के दौरान कुल आय 69.73 लाख के विरुद्ध 73.29 लाख रु. होना पाया गया। इसके बाद सरकारी अनुमतियां लेकर अक्टूबर 2019 में अभियुक्त निम्मू सेन के घर की तलाशी ली गई तो पाया गया कि उसके पास कुल आय के विरुद्ध 1.25 करोड़ रु. का व्यय था। बचाव पक्ष ने इस मामले में तर्क दिया कि अभियोजन ने इस खरीद-खर्च में अभियुक्त के पुत्रों व पुत्र वधु की आय को भी जोड़ लिया है। इसके अलावा मकान, प्लाट, विवाह खर्च, जेवरात की कीमत को भी बढ़ा- चढ़ाकर जोड़ा है। न्यायालय ने भी माना कि अभियोजन ने पुत्र-पुत्र वधु को अभियुक्तगण नहीं मानते हुए उनकी आय को निम्मू सेन की आय और खर्च में जोड़ दिया। जो सही नहीं है। इसके अलावा मकान, प्लाट, जेवर, विवाह खर्च के नाम पर जो राशि अभियोजन में दर्शाई गई है, उसे सुसंगत ढंग से प्रमाणित नहीं कराया गया। चूंकि न्यायालय का यह काम नहीं है कि वह अंदाजिया आधार आय-व्यय के आंकड़ों पर भरोसा करे। इसलिए अभियोजन पक्ष द्वारा अभियुक्त निम्मू पर लगाए गए आरोपों को खारिज करता है। इस मामले में सहायक समिति प्रबंधक निम्मू सेन को बरी करता है।
05/06/2024



