ओबीसी एडवोकेट वेल्फेयर एसो. ने की महाधिवक्ता प्रशांतसिंह को हटाने की मांग
जिस आदेश का हवाला देकर सरकार ओबीसी आरक्षण लागू नहीं किए जाने की बात कह रही है उस आदेश की सरकार कर रही है अवमानना : वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर

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सागर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा याचिका क्रमांक 18105/2021 में दिनांक 28/01/2025 में पारित खारिजी आदेश के कारण ओबीसी का आरक्षण निरंतर रूप से 13% होल्ड किए जा रहा है | समस्त भर्तियों के विज्ञापनों में होल्ड किए जाने का आधार याचिका क्रमांक 18105/2021 का लेख किया गया है, जबकि उक्त याचिका के समाप्त हो जाने के बाद महाधिवक्ता तथा सरकार अन्य याचिकाओं का हवाला देकर आरक्षण लागू नहीं किए जाने का बहाना बनाया जा रहा है।
महाधिवक्ता द्वारा सरकार को बताया गया है की याचिका क्रमांक WP. No.24847/ 2022 (हरीशंकर बरोदिया बनाम मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य) मेें पारित आदेश दिनांक 16.02.2023 का हवाला दिया जा रहा है तथा याचिका क्रमांक WP. No.3668/2022 (SHIVAM GAUTAM AND STATE OF M.P. OTHERS) मेें पारित आदेश दिनांक 04.5.2022 का भी हवाला दिया जा जाकर ओबीसी का 27% आरक्षण लागू नहीं किया जा रहा है ।
जबकि वस्तुस्थिति ये है कि याचिका क्रमांक 3668/2022 पीएससी के एक अनुसूचित जाति वर्ग का अभ्यर्थी है जिसने पीएससी 2020 के रिजल्ट में 13% होल्ड अनारक्षित वर्ग की वैधानिकता को चुनौती दी थी। जिसे जस्टिस शील नागू ने खारिज कर दिया था। तत्पश्चात उक्त आदेश के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी क्रमांक 24847/2022 दायर है इसलिए हाईकोर्ट के आदेश के हवाले से मध्य प्रदेश शासन द्वारा ओबीसी का 27% आरक्षण लागू नहीं करने का स्टेटमेंट नही दिया जा सकता है।
याचिका क्रमांक 3668/ 2022 मे पारित अन्तरिम आदेश दिनांक 04.05.2022 का हवाला दिया जा रहा है जबकी उक्त याचिका का केस स्टेटस डिस्पोज ऑफ है तथा उक्त याचिका सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर हो चुकी है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण लागू नहीं किए जाने के संबंध में कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया है।
इसलिए सरकार या प्रशासन उक्त याचिका के आदेश के कारण ओबीसी का आरक्षण होल्ड नहीं कर सकती है। उक्त याचिका का यदि बारीकी से अध्ययन किया जाए तो हाईकोर्ट ने वर्टिकल आरक्षण 50% से ज्यादा लागू नहीं करने का लेख किया है, यदि ओबीसी का बड़ा हुआ 13% आरक्षण अलग भी कर दिया जाए तो फिर भी सरकार 60% आरक्षण लागू करके भेदभाव कर रही है (उदाहरण : एससी का 16% एसटी का 20% ओबीसी का 14% ईडबल्यूएस का 10% कुल 60% ) अर्थात याचिका क्रमांक 3668 of 2022 मेें हाईकोर्ट द्वारा पारित अन्तरिम आदेश दिनांक 04.05.2022 महाधिवक्ता ओबीसी के प्रति दुर्भावना रखते हुए केवल ओबीसी का 13% आरक्षण लागू नहीं करने हेतु सरकार को गलत-सलत अभिमत बनाकर ओबीसी के लाखों युवाओ के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है। जिन्हें पद पर रहने का अधिकार नहीं है।
महाधिवक्ता द्वारा अपनी नियुक्ति दिनांक से ही आरक्षण कानूनों तथा अन्तरिम आदेशों की ओबीसी हितों के विपरीत गलत व्याख्या करके ओबीसी वर्ग को सामाजिक न्याय से वंचित करने का कार्य कर रहे हैं। इसलिए व्यापक जनहित को दृष्टिगत रखते हुए महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को तत्काल पद से हटाया जाना अति आवश्यक है, तथा मध्यप्रदेश सरकार को न्यायप्रिय, संविधानप्रिय एवं सामाजिक न्यायप्रिय योग्य अधिवक्ता को महाधिवक्ता नियुक्त करना आवश्यक है।
11/02/2025



