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विवि के प्रोफेसर डॉ. गौतम ने कनाडा में तर्कशीलता पर बोलते-बोलते भारत में जाति प्रथा, न्यूज चैनल्स और सनातन पर की टीका-टिप्पणी !

कनाडा में एक यू-ट्यूब पोर्टल में विवाह व्यवस्था से लेकर मांसाहार के बारे भी तर्क दिए।

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि के मानव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश गौतम इन दिनों उत्तरी अमेरिकी देश कनाडा में हैं। वे वहां रेसिस्ट(तर्कशील) सोसायटी ऑफ कनाडा के किसी आयोजन में शामिल होने गए हैं। इसी दौरान उन्होंने कनाडाई यू-ट्यूब पोर्टल द नवजोत ढिल्लन वॉल को एक लंबा इंटरव्यू दिया है। इसमें वे विभिन्न धर्मों और उनके ग्रंथों में लिखी बातों को तथ्यहीन बता रहे हैं। वे मेडिटेशन, स्प्रिच्युएलिटी, योग को भी महत्वहीन और लोगों को मूर्ख बनाने का जरिया बता रहे हैं। करीब डेढ़ घंटे के इस इंटरव्यू में डॉ. गौतम ने  कतिपय कट्टर अजा नेताओं की तरह सनातन की आस्था- विश्वास को आधारहीन साबित करने संबंधी तर्क दिए हैं।

वे बीच-बीच में मुस्लिम ईसाई और सिक्ख धर्म के बारे में भी बोले। लेकिन शब्दों के आघात सनातन की अपेक्षा बहुत हलके थे। वे बाकी धर्मों के भीतर कही गई बातों और उनके धार्मिक ग्रंथों में दर्ज घटनाओं के बारे में नाम मात्र भी नहीं बोले। उनके तर्क तो घूम-फिरकर सनातन विश्वास व परंपराओं को झूठा साबित करने वाले थे। एक जगह वह कहते हैं। चंद लोगों ने आर्थिक फायदे के लिए योग को प्रमोट किया। वरना तो नमाज भी योग है। इसे क्यों नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने ब्रह्मन्ड में राहू-केतू के नहीं होने से समुद्र मंथन को कोरी कल्पना बताया। अजा-जजा वर्ग की भारत में दुर्दशा पर बात की। बोले कि चुनाव के एक दिन पहले सफाई कार्य से जुड़े लोगों के पैर धोकर पीने से कुछ नहीं होता।भारतीय मीडिया पर अंधविश्वास व धर्म विशेष के हित में काम करने की बात कही। डॉ. गौतम ने भारतीय न्यूज चैनल्स को एक समुदाय विशेष की सोच वाला बताया। जो स्कूल कॉलेज के बजाए अपने और दूसरे देशों में धार्मिक स्थल बनाने वालों की वाह-वाही करता है। इससे पहले शुरुआत में उन्होंने कहा कि वह भी सनातन परंपरा के मुताबिक पूजा- पाठ करते थे। लेकिन जब जाना कि पृथ्वी का निर्माण लाखों-करोड़ों वर्ष पूर्व हुआ है। तब भी मानव आबादी थी। तब कोई धर्म या कार्यगत भेदभाव नहीं था। आगे और भी विश्वास आस्था को तर्क की कसौटी

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पर कसा तो मेरा धर्म नाम की इस व्यवस्था में कोई विश्वास नहीं रहा। आखिर में बोले पूरी दुनिया से सभी धर्म धीरे – धीरे खत्म होते जाएंगे। वहीं मानव विज्ञानी होने के नाते उन्होंने मांसाहार की आवश्यकता और  दुनिया भर में विवाह नाम की संस्था शनै:-शनैः खत्म होने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि मानव समाज में बदलाव, लोगों की धर्म में रुचि खत्म होने, जनसंख्या नियंत्रण और मेडिकल साइंस की तरक्की के कारण सिंगल मदर/ फादर का चलन बढ़ा है। आखिरी में वे बोले कि विवाह का अगला फार्मेशन होमो सेक्सुअलिटी, बाई- सेक्सुअल होना है। इसे मानव शास्त्र की विभिन्न अवधारणाओं से जोड़कर देखा जाना चाहिए।         

डॉ. गौतम और क्या- क्या बोले ये जानने के लिए ऊपर यू-ट्यूब वीडियो को क्लिक करें।

17/09/2024

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