जीत के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष बोले, न्यायिक अधिकारियों से अकेले नहीं मिलूंगा
51 वोट अधिक लेकर एड. जितेंद्रसिंह ने दी एड. अन्नी दुबे को शिकस्त

सागर। जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव के परिणाम बहुत हद तक अप्रत्याशित रहे। चुनावी हवा के अनुसार कांग्रेसी विचारधारा के एड.अंकलेश्वर दुबे को चौथी बार अध्यक्ष पद पर विजयी माना जा रहा था। लेकिन वह निकटतम मुकाबले में भाजपाई एड. जितेंद्रसिंह से 51 वोट से हार गए। जितेंद्रंसिंह को 592 और अंकलेश्वर अन्नी दुबे को 551 वोट मिले। हालांकि अंकलेश्वर की हार के कयास वोटिंग खत्म होने के बाद ही लगाए जाने लगे थे क्योंकि इस दफा चुनाव में रिकार्ड 92 + प्रतिशत वोट गिरे थे। कुल 1429मतदाताओं में से 1317 ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था।
इस चुनावी फेरबदल में अंकलेश्वर गुट के सचिव पद के प्रत्याशी एड. बीके यादव भी बच नहीं पाए। उन्हें तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा। इस पद पर वीरेंद्रसिंह राजपूत 523मत लेकर निर्वाचित घोषित किए गए। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी नरेंद्र पांडे को 332 वोट मिले।
कौरव बने उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष पद पर प्यासी की जीत
अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष पद पर महेंद्र सिंह कौरव ने प्रचंड जीत दर्ज की। उन्हें कुल 680 वोट मिले। जबकि निकटतम प्रत्याशी रवींद्र अवस्थी को 467 मत मिले। सहसचिव पद पर मनोज सेन को 509 वोट मिले। करीबी प्रत्याशी सुरेंद्र गौतम को 324 वोट मिले। पुस्तकालय अध्यक्ष पद पर योगेंद्र स्वामी 355 वोट लेकर विजयी रहे। नंबर- 2 पर अमित मिश्रा और महेंद्र सेन को 268- 268 मत मिले। महिला कार्यकारिणी सदस्य के पद पर अनीता राजपूत को 456वोट मिले। निकटतम प्रतिद्वंदी एनी गोस्वामी को 415 वोट मिले।
संघ के चुनाव अधिकारी वरिष्ठ अधिवक्ता केशवप्रसाद दुबे ने बताया कि पुरुष कार्यकारिणी में बहुत ज्यादा संख्या में प्रत्याशी हैं, इसलिए उनके मतों की गिनती अगले दिन की जाएगी।
वकील वर्सेस नाम के वकील के बीच मुकाबला साबित हुआ!
अधिवक्ता संघ का यह चुनाव पूरी तरह से भाजपा के खाते में गया है। ठाकुर वर्सेस ब्राह्मण वकील लॉबी के रूप में प्रचारित इस चुनाव में ठाकुरों ने बाजी मारी। दूसरा सबसे अहम पहलू ये रहा कि इस चुनाव में नियमित प्रेक्टिसनर यानी विशुद्ध वकील और केवल डिग्रीधारी और स्वयं को वकील बताने वालों की भी जमीन सामने आ गई। इस चुनाव में मूलत: वकालत की प्रेक्टिस कर जीवकोपार्जन करने वाले वकीलों के गुट की जीत हुई। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, सहसचिव से लेकर कोषाध्यक्ष, पुस्तकालय अध्यक्ष को इसका लाभ मिला। चर्चाओं के अनुसार पिछले कुछ चुनाव से वकालत छोड़ अन्य सभी व्यवसाय करने वाले एलएलबी डिग्रीधारी लोग इस चुनाव को बहुत हद तक प्रभावित कर रहे थे। जिसका प्रभाव सीधे न्यायालयीन कामकाज पर पड़ रहा था। इस बार प्रेक्टिसनर वरिष्ठ वकीलों ने इस कंडीशन पर एक्शन लेने का निर्णय लिया। नतीजतन रोज न्यायालय आने वाले वकीलों ने अपने प्रत्याशियों को जिता लिया। सागर वाणी से चर्चा में नव निर्वाचित अध्यक्ष जितेंद्रसिंह ने कहा कि अधिवक्ता संघ और ज्युडिशियरी में अब मर्यादित संबंध रहेगा। मैं कभी भी प्रधान न्यायाधीश अन्य न्यायिक अधिकारियों से अकेले मुलाकात नहीं करूंगा। जब बात होगी मय कार्यकारिणी के होगी।
17/02/2023



